THE CENTRE WANTS TO TRACE FAKE NEWS

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  • केंद्रीय सरकार चाहती है की फ़र्ज़ी ख़बरों का पता लगाया जाये
  • सोशल मीडिया चैनल्स हटाएंगी गैर क़ानूनी सामग्रियों को
  • whatsapp facebook और twitter लिस्ट में सबसे ऊपर

सरकार ने IT(सूचना प्रौद्योगिकी) अधिनियम क प्रस्तावित संशोधनों पर सार्वजानिक टिप्पणी की मांग की है, जो की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, व्हाट्सप्प फेसबुक एवं ट्विटर जैसे मंचों पर गैर कानूनी जानकारी के प्रवर्तक या originator का पता लगाने के लिए आवश्यक है.

जैसा की वर्ष 2018 में यह देखा गया की इन्ही सोशल मीडिया  प्लेटफॉर्म्स के झूटी खबरों के वजह से असीम गैर सामाजिक एवं हत्या की घटनाएं दर्ज हुई है.

सोमवार को जाती एक ड्राफ्ट के अनुसार, The Information Technology [Intermediaries guidelines (Amendment_Rules 2018, के अनुसार, प्राधिकारी द्वारा अधिसूचित किये जाने के बाद, मध्यस्त को 24 घंटे के भीतर वह गैर कानूनी सामग्री को, या तो हटा देना चाहिए या फिर अक्षम कर देना चाहिए.

यह फैसला, भारत की अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता एवं नैतिकता या फिर अदालत की अवमानना के सम्बन्ध में लिया गया है.

WHATSAPP, FACEBOOK, FB, TWITTER
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मध्यस्थ को चाहिए यह भी अपेक्षा की जाती है की वह इस तरह की जानकारी एवं सम्बंधित रिकार्ड्स को जांच उद्देश्यों के लिए कम से कम 180 दिनों के लिए संरक्षित करे जो की पहले 90 दिन था.

प्रस्तावित मानदंडों के अनुसार, surveillance एवं censorship के अंतर्गत, सरकार यह स्पष्ट करती है की वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी तरीके के गैर क़ानूनी सामग्रियों को support या विनियमित नहीं करती.

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वर्ष 2018 को सांकेतिक करते हुए, जिसमे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स  पर फैले गैर कानूनी खबरों एवं सामग्रियों की वजह से असामाजिक घटनाएं और हत्याओं का मामला सामने आया, सरकार ने इसे law enforcement के लिए एक नयी चुनौती बताई, जिसमे आतंकवादियों की भर्ती के लिए प्रलोभन एवं सञ्चालन शामिल है साथ ही अश्लील सामग्री, हिंसा फ़ैलन एवं हिंसा के लिए उकसाना शामिल है.

प्रस्तावित नियम यह भी बताते है की mediator को किसी भी सरकारी agency द्वारा मांगी गयी जानकारी या रिपोर्ट को 72 घंटे के भीतर ही देनी है.

धन्यवाद

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